क्रिकेट के मैदान से अभिनय की दुनिया में कदम रखने वाले अभिनेता रमनदीप के लिए बॉलीवुड का सफर बेहद अनिश्चितताओं भरा रहा है। हाल ही में इंडिया टीवी से खास बातचीत में अपनी आपबीती साझा करते हुए रमनदीप ने बताया कि वेब सीरीज 'CAT' के बाद 'राख' जैसा बड़ा प्रोजेक्ट क्रैक करने में उन्हें पूरे चार साल लग गए। एक वक्त ऐसा भी आया जब वे पूरी तरह निराश होकर मुंबई छोड़ने का मन बना चुके थे, लेकिन तभी उनके हाथ प्राइम वीडियो की 'राख' सीरीज लगी। इस प्रोजेक्ट में उन्होंने रज्जो का किरदार निभाया जो लोगों को बेहद पसंद आया और रमणदीप ने अपनी एक्टिंग का लोहा मनवा लिया है। रमनदीप अपनी इस सफलता का श्रेय अपने बड़े भाई के त्याग और समर्थन को देते हैं, जिनकी वजह से वे आज अपना पैशन जी पा रहे हैं। रमणदीप ने क्या खास बातें बताईं, जानने के लिए नीचे स्क्रोल करें।
मुंबई छोड़ने वाले थे रमनदीप, तभी मिली 'राख'
रमनदीप से जब सवाल किया गया, 'आपके अब तक के एक्टिंग सफर के बारे में कुछ बताएं। इस इंडस्ट्री में कदम रखने और 'राख' जैसी बड़ी सीरीज़ मिलने तक का सफर कैसा रहा?'इस सवाल का जवाब देते हुए रमणदीप ने अपने स्ट्रगल को खुले दिल से बयां किया। उन्होंने बताया कि फिल्मी दुनिया में पैर जमाना आसान नहीं होता, कड़ी मश्कत के बाद काम नसीब होता है और उसकी भी कोई गैरेंटी नहीं होती। एक्टर ने ये भी बताया कि वो ऐसे मुकाम पर पहुंच गए थे कि फिल्मी दुनिया छोड़कर आगे बढ़ने वाले थे कि तभी उनके दरवाजे पर 'राख' वेब सीरीज ने दस्तक दी और उन्हें सोनाली बेंद्रे, दिव्येंदु, राकेश बेदी और अली फजल जैसे मंझे हुए कलाकारों के साथ काम करने का मौका मिला।
'चार्म देखकर मत आओ, बीच का दौर कोई नहीं देखता'
उन्होंने इस बारे में बात करते हुए कहा, 'एक शब्द में बोलूं तो मेरा सफर आसान तो नहीं है, अगर कोई फिल्मी दुनिया में आना चाह रहा है और चाहत रखता है कि एक्टिंग तो करूं तो चार्म देखकर मत सोचो कि एक्टर बनना आसान है, वो सिर्फ फेम नजर आता है, लेकिन बीच के दौर में कैसे हाल में एक्टर होता है, ये किसी को नहीं पता, मुझे CAT के बाद चार साल लग गए ये प्रोजेक्ट क्रैक करने में, वो भी उस मोड़ पर जब मुझे लगा कि अब मुंबई छोड़ देना पड़ेगा। ऐसे मोड़ पर आकर मुझे ये काम मिला। आपको कुछ नहीं पता कि कब क्या हो जाएगा, होपफुल रहो, ग्रेटफुल रहो, भगवान पर भरोसा रखो, चीजें अच्छी होतीं हैं और दुनिया में अच्छे लोग होते हैं जो टैलेंट को मौका देते हैं।
क्रिकेट के मैदान से एक्टिंग तक का सफर
क्रिकेट से एक्टिंग की दुनिया में आने पर उन्होंने कहा, 'क्रिकेट मैं बस यही कहना चाहूंगा कि जर्नी सबकि एक जैसी है, मैं उसे स्ट्रगल का नाम देकर डिफाइन नहीं करना चाहूंगा, मैं उसे प्रोसेस ही कहना चाहता हूं, अप डाउन आएंगे, क्या पॉजिटिव होगा, क्या पता इसके बाद मेरे पास काम की लाइन लग जाए और क्या पता मेरे पास इसके बाद भी काम न हो, मुझे कुछ पता नहीं है, चींजे बहुत अनसर्टेन हैं, मैंने अपने बहुत सीनियर आर्टिस्ट के इंटरव्यूज देखे हैं, जिन्होंने बताया कि मैंने मार्टेक में शानदार फिल्म दी फिर भी 3 साल काम ही नहीं था। वही है कि आसान नहीं हैं, मैं तो क्रिकेट खेलना चाहता था, इंडिया को रिप्रेसेंट करना चाहता था और वहां से यहां तक आना वो फील्ड स्विच कर के, ये मेरे वाइल्डेस्ट ड्रीम में था।'
बड़े भाई के त्याग पर बोले रमनदीप
भाई का आभार जताते हुए उन्होंने कहा, 'मैं यहां तक पहुंचा उसके लिए मैं बहुत आभारी हूं, उन सभी लोगों का जिन्होंने मुझे सपोर्ट किया। खास तौर पर मैं अपने बड़े भाई को लेकर बहुत ग्रेटफुल हूं। वो बहुत टैलेंटेड है और होता है न कि फैमिली में जो बड़ा होता है उसके पास सबसे पहले सारी जिम्मेदारियां आ जाती हैं तो कहीं न कहीं बहुत कुछ उसको सैक्रिफाइज करना पड़ता है, वो हैं इसलिए ही मैं एक्टिंग कर पा रहा हूं नहीं तो भी किसी नौकरी में लैपटॉप के आगे बैठकर काम कर रहा होता, टूटा हुआ कि मैं करना कुछ और चाहता था और कर कुछ और रहा हूं। मैं किसी के काम को कम नहीं आंक रहा, लेकिन अपना पैशन फॉलो कर पाने में भी सिर्फ अकेले आप नहीं होते, बल्कि आपके पीछे भी बहुत से लोग होते हैं।'